For those, Who seek Rhythm in their Life
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Sunday, October 19, 2014

मैं चला

हर ख़ुशी नाखुश मुझसे, साया गमो का घना,
यह रंज़िशे , यह बंदिशें, हैं कर रही मुझको फ़ना। 

न किरण-ऐ-उम्मीद यहाँ, न चट्टान-ऐ-हौसला,
 सूना-सूना,खाली-खाली, मैं और मेरा घोंसला। 

चल रहा हूँ बेबस मुसाफिर, न मंज़िल पता न रास्ता,
बस झलक दिखा मुझे, खुद तुझे खुद का वास्ता। 

फर्क भूल गया हूँ मैं, सुबह और शाम के बीच का,
न जाने कब साँसे रुके, और थम जाए यह समां। 

जो हो गया, सो हो गया, ज़िन्दगी तुझसे नही गिला,
थाम मौत का हाथ मैं, ऐ 'नादान' अब मैं चला।  


Saturday, October 18, 2014

घाट एक ही जहाँ का

मर रहा हूँ हर वक़्त दर बदर, इम्तिहान हैं मेरी इन्तिहाँ का,
सपनो में उभर आता हैं कभी-कभी, घाट एक ही जहाँ का। 

साथ हैं मेरे यार-दोस्त, हर शाम महफ़िल जमती हैं,
पर हैं एक सूनापन सा कही, इंतज़ार हैं बस फ़ना का। 

एक अदद को दी मैंने  कसम,  ज़िंदा रखना मुझे कलम से,
वरना मरने के बाद कौन याद करेगा, इस ज़र्ज़र मकाँ का। 

देखता हूँ हर शाम रात, खिड़की  से अपनी झाँक कर,
बह रहा हैं एक खामोश दरिया, छोड़ के दामन जहाँ का। 

बस अब न रोकना मुझे, जाने दे  मुझे ऐ 'नादान',
इंतज़ार करती हैं माँ मेरी, जहा हैं घाट एक ही जहाँ का। 

Friday, October 17, 2014

जब याद वो मंज़र आते हैं

छलक पड़ते हैं आंसू भी अब, जब याद वो मंज़र आते हैं,
खेत खलिहान, फूल पौधे' भी अब, शमशान से नज़र आते हैं। 

रुकी-रुकी सी हैं यह फिज़ाएँ, ठहरा सा हैं यह आसमां,
पर इस दिल में कभी कभी, उसकी याद के बवंडर  आते हैं। 

नही रहा कोई भी इस दुनिया मैं मेरा, इस दर्द के सिवा,
मरहम लगाने के लिए कभी कभी,खामोश समुन्दर आते हैं। 

जा भी नही सकता, न ठहर सकता हूँ यहाँ,
रात को सोता भी नही हूँ, सपने भी भयंकर आते हैं।  

पर सुन ले ऐ 'नादान' , नही मान सकता हुँ  मैं  हार,
मेरी होसला अफ़ज़ाही के लिए खुद, मुक्कदर क सिकंदर आते हैं। 

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