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Monday, December 29, 2014

वो......

सालो से खड़ा हैं,उस गली के मोड़ पर,
बोला नही हैं अब तक… 
बस देखता रहता है…। 
उधर से गुज़रते लोगो को,
सुनता रहता हैं,उनकी बातो को॥ 

जाने क्या-क्या सुना होगा??
पर खड़ा हैं आज भी तनकर। 
जैसे खुद आज भी श्रेष्ठ हैं 
मुझसे,तुमसे और हम सबसे ॥ 

याद नही,गर झुका हो कभी,
बस बारिश में झूमते देखा हैं। 
ललक सी  आसमां को छूने की 
पर  पाँव अब भी जमीन पर है॥ 

जानता हैं जैसे सबको,
सो ताल्लुक बढ़ाता  नही किसी से । 
बच्चो के साथ देखा हैं खेलते,
तो  कभी पथिक को पंखा झलते॥ 

कुछ ऐसा ही हैं .... सालो से खड़ा 
उस गली के मोड़ पर... वोह कदम्ब का पेड़ ॥ 


Sunday, December 28, 2014

मेरी दिल्ली

बरसो बाद मुझे मेरी दिल्ली
महफ़ूज़ लगी। .......
भरे भेडियो के बीच ,में एक नन्ही सी जान
बेख़ौफ़ लगी॥
बरसो बाद.....
हज़ारो मशाले थी जनपथ पर
प्रतिशोध की,न्याय की
इंडिया की मशाल, अमन -ओ-चैन की
बड़ी अच्छी लगी ॥
बरसो बाद…
अनशन पर बैठे लोग,
दिनों-दिन गंवाए
एक भूखे  को मिली रोटी 
दिल को रहत मिली ॥
बरसो बाद। …।
आँखों का पानी जहा सूख ही चूका था,
दामिनी की पुकार पर,
कुछ आँखों में नमी दिखी ,
बरसो बाद......
कभी बुरका,कभी घाघरा,
तो कभी जीन्स टॉप में दिखी ।
आँचल में गरिमा-इतिहास समेटे,

एक नारी का सा ही रूप लगी ॥
बरसो बाद मुझे मेरी दिल्ली,
मेरी सी लगी ।
बढ़ती,सिमटती, आब सी ढलती
मेरा अपना ही रूप लगी ॥ 

Saturday, December 27, 2014

अच्छी लगी

खिड़की से झांकती
वो बारिश की बौछार 
शहरी मकानो में 
दादी की खाट 
अच्छी लगी.…!!!!! 

महंगाई के दौर में 
माँ की दांत, बड़ी सस्ती थी 
मतलब के इस जहाँ में 
दोस्त की फटकार 
अच्छी लगी.…!!!!!

एक बेबस को दिए 
जोह कुछ कदमो का साथ 
दुआओ से भरे हाथ 

अच्छी लगी.…!!!!! 




भूखे  बच्चे को जब दी थी रोटी 
वो तृप्त सी मुस्कान अच्छी लगी 
एक मजनू को मेरे 
प्रेम की तकरार 
अच्छी लगी.…!!!!!

ईद और दिवाली, मणि थी एक दिन 
जश्न की वह रात, बड़ी अच्छी लगी 
धर्म क नाम पर बने आडंबरों में
कबीर और रहीम की जाती,
अच्छी लगी.…!!!!!


शगुफ़्ते बच्चो की बात पर 
बस हंस दिए करती थी 
पर आसमां को आगोश में भरने की 
अच्छी लगी.…!!!!! 

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